Shiv Tandav Strotram - 13¶
The Shloka¶
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमस्तवं पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धचेतसा ।
भवन् विमुक्तदुर्लभं तस्य जन्मजन्मनि श्रियं ददाति शम्भुभक्तिमुक्तिसाधनम् ॥ १३ ॥
Meaning¶
इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमस्तवं पठन् स्मरन् ब्रुवन्नरो विशुद्धचेतसा ।:
जो मनुष्य इस उत्कृष्ट स्तुति को निरंतर पढ़ता है, स्मरण करता है और शुद्ध मन से बोलता है…
यह पंक्ति बताती है कि जो व्यक्ति शिव तांडव स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करता है, उसका स्मरण करता है और शुद्ध हृदय से इसका उच्चारण करता है, उसे इसका फल प्राप्त होता है।
भवन् विमुक्तदुर्लभं तस्य जन्मजन्मनि श्रियं ददाति शम्भु भक्तिमुक्तिसाधनम् ॥ १३ ॥:
शिव, उसके लिए जन्म-जन्म में दुर्लभ धन और समृद्धि प्रदान करते हैं, और भक्ति व मुक्ति का साधन बनते हैं।
शिव उस व्यक्ति को जन्म-जन्मों तक धन, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करते हैं। यह स्तोत्र भक्ति और मुक्ति प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है।
Summary¶
यह श्लोक शिव तांडव स्तोत्र के पाठ, स्मरण और शुद्ध भाव से उच्चारण करने के महत्व को बताता है। यह स्तोत्र न केवल धन और समृद्धि प्रदान करता है, बल्कि भक्ति और मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
Meaning of words¶
Word | Meaning |
---|---|
इमं | इस |
हि | निश्चित रूप से |
नित्यमेव | हमेशा, निरंतर |
मुक्तम् | मुक्त करने वाला |
उत्तमम् | उत्कृष्ट, श्रेष्ठ |
स्तवम् | स्तुति |
पठन् | पढ़ने वाला |
स्मरण् | स्मरण करने वाला, याद करने वाला |
ब्रुवन् | बोलने वाला |
नरः | मनुष्य |
विशुद्धचेतसा | शुद्ध मन से |
भवन् | आप |
विमुक्तदुर्लभम् | मुक्ति प्राप्त करना दुर्लभ है |
तस्य | उसकी |
जन्मजन्मनि | जन्म-जन्म में |
श्रियं | धन, समृद्धि, लक्ष्मी |
ददाति | देते हैं |
शम्भु | शिव |
भक्तिमुक्तिसाधनम् | भक्ति और मुक्ति का साधन |