Shiv Tandav Strotram - 12

The Shloka

चलाकलापशालिनी तिलोचने ललाटपट्ट- रज्यमानचन्द्रशेखरस्फुरत्सुभासुरच्छविः ।

प्लवन्निलापमध्यगा सुरारिदर्पदर्दनं मुदा मुहुर्विबोधयन्नमस्तु मे शिवः ॥ १२ ॥

Meaning

चलाकलापशालिनी तिलोचने ललाटपट्ट- रज्यमानचन्द्रशेखरस्फुरत्सुभासुरच्छविः ।:

जिनके नेत्र चंचल कलाओं से भरे हुए हैं, और जिनके ललाट पर चंद्रमा के समान चमकते हुए चंद्रशेखरों की छवि है, जो तेजस्वी और सुंदर है।


प्लवन्निलापमध्यगा सुरारिदर्पदर्दनं:

जो वायुमंडल में विचरण करते हैं और इंद्र के गर्व को नष्ट करने वाले हैं।


मुदा मुहुर्विबोधयन्नमस्तु मे शिवः ॥ १२ ॥:

जो आनंद से बार-बार मुझे प्रेरित करते हैं, मैं उन शिव को प्रणाम करता हूँ।


Summary

यह श्लोक भगवान शिव के सौंदर्य, शक्ति और करुणा का वर्णन करता है। यह बताता है कि कैसे शिव अपने भक्तों को आनंदित करते हैं और उन्हें प्रेरित करते हैं। यह श्लोक शिव के उस रूप का वर्णन करता है जो चंचल, तेजस्वी और शक्तिशाली है, और जो इंद्र के अहंकार को भी शांत करने में सक्षम है।

Meaning of words

Word

Meaning

चलाकलापशालिनी

चलती हुई कलाओं से भरी हुई, चंचल

तिलोचने

नेत्रों में, आँखों में

ललाटपट्ट

ललाट पर, माथे पर

रज्यमानचन्द्रशेखर

रजत के समान चमकते हुए चंद्रमा के समान सिर वाले (शिव), चंद्रशेखरों के समान

स्फुरत्सुभासुरच्छविः

तेजस्वी, सुंदर, प्रकाशमान छवि वाले

प्लवन्निलापमध्यगा

हवा में तैरते हुए, वायुमंडल में विचरण करने वाले

सुरारिदर्पदर्दनं

सुरारि (इंद्र) के गर्व को नष्ट करने वाले

मुदा

आनंद से, खुशी से

मुहुर्विबोधयन्

बार-बार जगाने वाले, प्रेरित करने वाले

नमस्तु

नमस्कार, प्रणाम

मे

मुझे

शिवः

शिव