Shiv Tandav Strotram - 10

The Shloka

सहस्रलोचनप्रभृतिशेषलेखरादिभि- र्हिपुष्पधूलिधूसरोर्ध्वलेनदीयकम् ।

भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥ १० ॥

Meaning

सहस्रलोचनप्रभृतिशेषलेखरादिभि- र्हिपुष्पधूलिधूसरोर्ध्वलेनदीयकम्:

हजार आँखों वाले शिव और शेषनाग, लेख और अन्य देवताओं द्वारा, हिमवान पर्वत की पुष्प धूलि से तथा धूसर रंग की गंगा नदी के जल से युक्त हैं।

यह पंक्ति शिव के दिव्य स्वरूप का वर्णन करती है, जिसमें उनकी आँखों की संख्या, देवताओं का सम्मान और पवित्र नदियों का उल्लेख है।


भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः:

वे सांपों के राजा (शेषनाग) की माला से सुशोभित हैं और उनकी जटाजूटें बंधी हुई हैं।

यह पंक्ति शिव के आभूषणों और उनके केशों के बंधन का वर्णन करती है।


श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः:

वे हमेशा के लिए लक्ष्मी के लिए चंद्रमा के समान हों।

यह पंक्ति शिव को चंद्रमा के समान शांत और सुंदर बताती है, जो हमेशा लक्ष्मी के साथ रहें।


Summary

यह श्लोक भगवान शिव के दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप का वर्णन करता है। यह उनकी सुंदरता, पवित्रता और लक्ष्मी के साथ उनके संबंध को दर्शाता है। यह श्लोक शिव भक्तों के लिए एक प्रेरणा है और उन्हें भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

Meaning of words

Word

Meaning

सहस्रलोचन

हजार आँखों वाले (शिव)

सहस्र - हजार, लोचन - आँखें

प्रभृति

और

आदि से लेकर

शेषलेखरादिभिः

शेषनाग, लेख और अन्य देवताओं द्वारा

शेष - शेषनाग, लेख - लेखन देवता, आदिभिः - और अन्य देवताओं द्वारा

हिपुष्पधूलि

हिमवान पर्वत की पुष्प धूलि

हिम् - हिमवान, पुष्पधूलि - फूलों की धूल

धूसरोर्ध्वलेनदीयकम्

धूसर रंग की गंगा नदी के जल से युक्त

धूसर - धूसर रंग, ऊर्ध्वलेन - ऊपर की ओर से, नदीयकम् - नदी के जल से युक्त

भुजङ्गराजमालया

सांपों के राजा (शेषनाग) की माला से

भुजङ्गराज - सांपों का राजा, मालया - माला

निबद्धजाटजूटकः

जटाजूट से बंधे हुए

निबद्ध - बंधे हुए, जाटजूटकः - जटाजूट

श्रियै

लक्ष्मी के लिए

श्री - लक्ष्मी

चिराय

हमेशा के लिए

स्थायी रूप से

जायतां

हो

उत्पन्न हो

चकोरबन्धुशेखरः

चकोर पक्षी के मित्र, चंद्रमा के समान

चकोरबन्धु - चकोर पक्षी का मित्र, शेखरः - चंद्रमा