Shiv Tandav Strotram - 8¶
The Shloka¶
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकिनः करस्थपद्मनाभपद्मजादिसुर्वराय
दक्षमर्दनोद्भवाय दण्डमुण्डमण्डनाय तस्मै ते नमोऽस्तु रुद्र रूपाय तस्मै ते नमः ॥ ८ ॥
Meaning¶
यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकिनः:
भगवान शिव यक्षों के समान रूप वाले हैं, उनकी जटाएँ हैं और वे पिनाक धनुष धारण करते हैं।
करस्थपद्मनाभपद्मजादिसुर्वराय:
भगवान शिव के हाथों में पद्मनाभ (विष्णु) और पद्मजा (लक्ष्मी) सहित सभी देवताओं का वर्चस्व है, वे सभी देवताओं से बढ़कर हैं।
दक्षमर्दनोद्भवाय दण्डमुण्डमण्डनाय:
भगवान शिव दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने के कारण उत्पन्न हुए और उन्होंने दण्ड और मुण्ड नामक राक्षसों के सिरों को अपनी माला में धारण किया।
तस्मै ते नमोऽस्तु रुद्र रूपाय तस्मै ते नमः ॥ ८ ॥:
उग्र रूप वाले भगवान शिव को मेरा प्रणाम है, उन्हें बार-बार प्रणाम है।
Summary¶
यह श्लोक भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी शक्ति का वर्णन करता है। यह उनके उग्र रूप, देवताओं पर उनकी श्रेष्ठता और राक्षसों पर उनकी विजय को दर्शाता है। अंत में, भक्त उन्हें प्रणाम करता है।
Meaning of words¶
Word | Meaning |
---|---|
यक्षस्वरूपाय | यक्ष के स्वरूप वाले, यक्षों के समान रूप वाले। |
जटाधराय | जटाएँ धारण करने वाले, जिनके सिर पर जटाएँ हैं। |
पिनाकिनः | पिनाक धनुष धारण करने वाले, पिनाक धनुष प्रसिद्ध है भगवान शिव का। |
करस्थपद्मनाभपद्मजादिसुर्वराय | जिनके हाथ में पद्मनाभ (विष्णु) और पद्मजा (लक्ष्मी) सहित सभी देवताओं का वर्चस्व है। |
दक्षमर्दनोद्भवाय | दक्ष के मर्दन (वध) से उत्पन्न हुए, दक्ष के यज्ञ को नष्ट करने के कारण। |
दण्डमुण्डमण्डनाय | दण्ड और मुण्ड नामक राक्षसों के सिरों को मण्डन (सजावट) के रूप में धारण करने वाले। |
तस्मै | उन्हें, उस भगवान शिव को। |
ते | आपको। |
नमोऽस्तु | नमस्कार है, प्रणाम है। |
रुद्र रूपाय | रुद्र के रूप वाले, उग्र रूप वाले। |
तस्मै | उन्हें, उस भगवान शिव को। |
ते | आपको। |
नमः | प्रणाम है। |