Shiv Tandav Strotram - 7

The Shloka

अनल्पकल्पवल्लीसकलप्रसूनजालिका- कुसुमाञ्जलिस्थिते पदारविन्दकान्तिभे ।

तनोति बुद्धिवासनामनोभिलाषपूरणं करोतु मामयि क्षयक्षयाय सम्मुखे शिवः ॥ ७ ॥

Meaning

अनल्पकल्पवल्लीसकलप्रसूनजालिका- कुसुमाञ्जलिस्थिते पदारविन्दकान्तिभे ।:

यह पंक्ति भगवान शिव के चरणों की सुंदरता का वर्णन करती है। अनगिनत युगों से फैली हुई बेलों और सभी प्रकार के फूलों के जालों से बने हुए फूलों की अंजली में भगवान शिव के चरण स्थित हैं, जिनकी चमक अद्भुत है।


तनोति बुद्धिवासनामनोभिलाषपूरणं करोतु मामयि क्षयक्षयाय सम्मुखे शिवः ॥:

यह पंक्ति भगवान शिव से प्रार्थना है। हे शिव, आप मेरी बुद्धि, इच्छाओं और मन की अभिलाषाओं को पूर्ण करें। आप मुझे विनाश और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति प्रदान करें, और अपनी उपस्थिति से मुझे धन्य करें।


Summary

यह श्लोक भगवान शिव के चरणों की महिमा और उनसे मुक्ति की प्रार्थना का वर्णन करता है। यह बताता है कि भगवान शिव भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और उन्हें जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करते हैं।

Meaning of words

Word

Meaning

अनल्पकल्पवल्ली

अनगिनत युगों से फैली हुई बेल

सकलप्रसूनजालिका

सभी फूलों के जालों से बनी हुई

कुसुमाञ्जलिस्थिते

फूलों की अंजली (हाथों में लिए हुए फूलों) में स्थित

पदारविन्दकान्तिभे

चरणों की चमक से

तनोति

बढ़ाता है, फैलाता है

बुद्धिवासनामनोभिलाषपूरणं

बुद्धि, इच्छाओं और मन की अभिलाषाओं को पूर्ण करने वाला

करोतु

करे

मामयि

मुझमें

क्षयक्षयाय

विनाश और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति के लिए

सम्मुखे

सामने, उपस्थिति में

शिवः

शिव