Shiv Tandav Strotram - 4

The Shloka

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।

धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक- प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥ ४ ॥

Meaning

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल- द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।:

भयंकर माथे पर चिह्न लिए हुए, भयंकर आग से चमकते हुए, अग्नि में आहुति देने योग्य, महान और भयंकर पांच मुखों वाले शिव में मुझे आनंद है।


धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक- प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥ ४ ॥:

पृथ्वी, हिमालय और पार्वती की सुंदरता से उत्पन्न कलाकृति को बनाने वाली अद्वितीय शिल्पिनी, तीन नेत्रों वाले शिव में मुझे आनंद है।


Summary

यह श्लोक भगवान शिव के उग्र और सुंदर दोनों रूपों का वर्णन करता है। यह उनके शक्तिशाली और विनाशकारी स्वभाव के साथ-साथ उनकी रचनात्मक और कलात्मक क्षमता को भी दर्शाता है। कवि को शिव के इन दोनों रूपों में आनंद और प्रेम महसूस होता है।

Meaning of words

Word

Meaning

कराल

भयंकर, उग्र

भाल

माथा, मस्तक

पट्टिका

पट्टिका, चिह्न

धगद्धगद्धगज्ज्वल

तेजस्वी, प्रज्वलित, भयंकर आग से चमकता हुआ

धनञ्जयाहुतीकृत

अग्नि में आहुति देने के योग्य, अर्पण किया हुआ

प्रचण्ड

भयंकर, महान, तीव्र

पञ्चसायके

पांचों मुखों वाले (शिव)

धरा

पृथ्वी

हरेन्द्र

हिमालय

नन्दिनी

हिमालय की पुत्री (पार्वती)

कुचाग्र

स्तनों की चोटी

चित्रपत्रक

सुंदर चित्र, कलाकृति

प्रकल्पनैकशिल्पिनि

कल्पना से कलाकृतियाँ बनाने वाली, अद्वितीय शिल्पिनी

त्रिलोचने

तीन नेत्रों वाले (शिव)

रतिर्मम

मुझे आनंद, मेरी प्रीति