Shiv Tandav Strotram - 2

The Shloka

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमस्तके ।

धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥

Meaning

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमस्तके ।:

शिव की जटाएँ उलझी हुई हैं, घूम रही हैं, स्वच्छ झरनों के समान हैं, और लहरदार बेलों से सुशोभित उनके मस्तक पर विराजमान हैं।

यह पंक्ति शिव के मस्तक पर जटाओं के सौंदर्य का वर्णन करती है। जटाएँ न केवल उलझी हुई हैं बल्कि उनमें पवित्रता और गतिशीलता भी है।


धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके किशोरचन्द्रशेखरे ।:

युवा चन्द्रशेखर (शिव) के ललाट पर तीव्र प्रकाश चमक रहा है।

यह पंक्ति शिव के ललाट पर चमकते तीसरे नेत्र का वर्णन करती है, जो तेज और प्रकाश से भरपूर है।


रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ २ ॥:

मेरा हर क्षण उनसे प्रेम बढ़ता जाता है।

यह पंक्ति कवि के शिव के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति को व्यक्त करती है।


Meaning of words

Word

Meaning

जटा

जटाएँ (बाल)

कटाहसम्

कटी हुई, उलझी हुई

भ्रम

घूमना, चक्कर लगाना

भ्रमन्निलिम्प

घूमती हुई, स्वच्छ

निलिम्प - स्वच्छ, निर्मल

निर्झरी

झरना, जलप्रवाह

विलोल

लहरदार, टेढ़ी-मेढ़ी

वीचिवल्लरी

बेलें, लताएँ

विराजमानमस्तके

मस्तक पर शोभायमान

विराजमान - शोभायमान, विराजमान

धगद्धगद्धगज्ज्वल

तेजस्वी, प्रज्ज्वलित

धगद्धगद्धग - तीव्र प्रकाश, ज्वाला

ललाटपट्टपावके

ललाट पर चमकने वाले

ललाटपट्ट - ललाट का आभूषण, माथे पर चमक

किशोरचन्द्रशेखरे

युवा चन्द्रशेखर (शिव)

चन्द्रशेखर - चंद्रमा को धारण करने वाले (शिव)

रतिः

प्रेम, अनुराग

प्रतिक्षणं

हर क्षण, प्रत्येक पल

मम

मेरा