Full Shloka¶
The Shloka¶
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त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्
त्रिजन्मपाप संहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
अखण्ड बिल्व पात्रेण पूजिते नन्दिकेश्र्वरे
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत्
सोमयज्ञ महापुण्यं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च
कोटि कन्या महादानं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
लक्ष्म्या स्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्
अघोरपापसंहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनम्
प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे
अग्रतः शिवरूपाय एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥
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Meaning / Summary¶
बिल्वाष्टकम स्तोत्र बिल्व पत्र की गहन आध्यात्मिक शक्ति को रेखांकित करता है, जिसे भगवान शिव को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह बताता है कि भक्ति के साथ अर्पित किया गया एक भी बिल्व पत्र विस्तृत अनुष्ठानों, यज्ञों या दान कार्यों से अधिक शक्तिशाली होता है। यह सादगी, पवित्रता और इस पवित्र भेंट के माध्यम से भक्त और देवता के बीच सीधे संबंध पर जोर देता है, जिससे मोक्ष, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है। यह भी निहित है कि बिल्व वृक्ष स्वयं दिव्य ऊर्जाओं का एक प्रकटीकरण है, जिसकी जड़ें ब्रह्मा, तना विष्णु और पत्ते शिव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बिल्वाष्टकम भगवान शिव को समर्पित आठ श्लोकों का एक स्तोत्र है, जो उन्हें बिल्व पत्र (बेल पत्र) चढ़ाने के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालता है। प्रत्येक श्लोक बिल्व पत्र के विभिन्न रूपों को अर्पित करने से प्राप्त होने वाले अपार पुण्य का वर्णन करता है, उनकी पवित्रता और शिव के साथ दिव्य संबंध तथा ऐसी भक्ति के लाभों पर जोर देता है।
The Bilvashtakam hymn underscores the profound spiritual power of the Bilva leaf, considered extremely sacred to Lord Shiva. It suggests that even a single Bilva leaf offered with devotion is more potent than elaborate rituals, yajnas, or charitable acts. It emphasizes simplicity, purity, and the direct connection between the devotee and the deity through this sacred offering, leading to liberation, prosperity, and peace. It also implies that the Bilva tree itself is a manifestation of divine energies, with its roots representing Brahma, stem Vishnu, and leaves Shiva.
Bilvashtakam is an eight-verse hymn dedicated to Lord Shiva, highlighting the spiritual significance of offering Bilva leaves (Aegle marmelos) to Him. Each verse describes the immense merit gained by offering various forms of Bilva leaves, emphasizing their purity and divine connection to Shiva, along with the benefits of such devotion.