Madhurashtakam - 2¶
The Shloka¶
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वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
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vacanaṁ madhuraṁ caritaṁ madhuraṁ vasanaṁ madhuraṁ valitaṁ madhuram ।
calitaṁ madhuraṁ bhramitaṁ madhuraṁ madhurādhipaterakhilaṁ madhuram ॥
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Meaning / Summary¶
यह श्लोक भगवान कृष्ण की सर्वव्यापी मधुरता को उजागर करता है। यह उनके व्यक्तित्व और अस्तित्व के विभिन्न पहलुओं, उनके वचन और कार्यों से लेकर उनके शारीरिक रूप और गतिविधियों तक, की व्यवस्थित रूप से प्रशंसा करता है, प्रत्येक को स्वाभाविक रूप से ‘मधुरम्’ (मधुर) घोषित करता है। ‘मधुरम्’ की बार-बार पुष्टि भक्ति और विस्मय की गहरी भावना पैदा करती है, इस बात पर जोर देती है कि कृष्ण केवल मधुर नहीं हैं, बल्कि ‘मधुरता के स्वामी’ (मधुराधिपति) हैं जिनसे सभी आकर्षण और आनंद उत्पन्न होते हैं। यह भक्त को कृष्ण के दिव्य रूप और लीलाओं के हर पहलू पर विचार करने और उसका आनंद लेने के लिए आमंत्रित करता है।
उनके वचन मधुर हैं, उनका चरित्र मधुर है, उनके वस्त्र मधुर हैं, उनकी भंगिमा मधुर है। उनकी चाल मधुर है, उनका भ्रमण मधुर है; मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
मधुराष्टकम् का यह श्लोक कहता है कि भगवान कृष्ण का हर पहलू मधुर है। उनके वचन, चरित्र, वस्त्र, भंगिमा, चाल और भ्रमण सभी को मधुर बताया गया है। अंत में, यह कहा गया है कि मधुरता के स्वामी कृष्ण का सब कुछ मधुर है।
This shloka highlights the all-encompassing sweetness of Lord Krishna. It systematically praises various facets of His personality and existence, from His words and actions to His physical appearance and movements, declaring each to be inherently ‘madhuram’ (sweet). The repeated affirmation of ‘madhuram’ creates a profound sense of devotion and awe, emphasizing that Krishna is not merely sweet, but the very ‘Lord of Sweetness’ (Madhurādhipati) from whom all charm and delight originate. It invites the devotee to contemplate and relish every aspect of Krishna’s divine form and pastimes.
His speech is sweet, His character is sweet, His attire is sweet, His graceful bearing is sweet. His movements are sweet, His wanderings are sweet; everything about the Lord of sweetness is sweet.
This verse from Madhurashtakam declares that every aspect of Lord Krishna is sweet. His words, character, clothes, posture, movements, and wanderings are all described as sweet. Concluding, it states that everything belonging to Krishna, the Lord of sweetness, is sweet.
Sentence - 1¶
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वचनं मधुरं चरितं मधुरं वसनं मधुरं वलितं मधुरम् ।
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Meaning¶
उनके वचन मधुर हैं, उनका चरित्र मधुर है, उनके वस्त्र मधुर हैं, उनकी भंगिमा मधुर है।
His speech is sweet, His character is sweet, His attire is sweet, His graceful bearing is sweet.
Meaning of Words¶
वचनं | vacanam | ||
वचन, वाणी | Speech, words | ||
मधुरं | madhuram | ||
मधुर, मीठा, आकर्षक | Sweet, charming | ||
चरितं | caritam | ||
चरित्र, आचरण, कृत्य | Character, deeds, conduct | ||
वसनं | vasanam | ||
वस्त्र, पहनावा | Attire, clothing | ||
वलितं | valitam | ||
भंगिमा, मोड़, घुमाव | Graceful bearing, posture, slight bend |
Sentence - 2¶
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चलितं मधुरं भ्रमितं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ॥
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Meaning¶
उनकी चाल मधुर है, उनका भ्रमण मधुर है; मधुरता के स्वामी का सब कुछ मधुर है।
His movements are sweet, His wanderings are sweet; everything about the Lord of sweetness is sweet.
Meaning of Words¶
चलितं | calitam | ||
चाल, गति, चलना | Movement, walking | ||
भ्रमितं | bhramitam | ||
भ्रमण, घूमना, चंचल गति | Wandering, roaming, playful movement | ||
मधुराधिपतेर | madhurādhipateḥ | ||
मधुरता के स्वामी का | Of the Lord of sweetness | ||
अखिलं | akhilam | ||
समस्त, सम्पूर्ण, सब कुछ | Entire, whole, all |