Mahishasura Mardini - 2¶
The Shloka¶
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सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतशोषिणि दुर्मतिपोषिणि दोषरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥
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suravaravarṣiṇi durdharadharṣiṇi durmukharṣiṇi harṣarate
tribhuvanapoṣiṇi śaṅkaratoṣiṇi kilbiṣamoṣiṇi ghoṣarate
danujaniroṣiṇi ditisutaśoṣiṇi durmatipoṣiṇi doṣarate
jaya jaya he mahiṣāsuramardini ramyakpardini śailasute ॥
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Meaning / Summary¶
यह श्लोक देवी दुर्गा की शक्ति और मातृत्व का प्रतीक है। यह हमें बताता है कि देवी दुर्गा हमेशा अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें सही मार्ग पर ले जाती हैं।
हे देवों पर वर्षा करने वाली, दुस्साहसी शत्रुओं का नाश करने वाली, दुष्ट मुख वाले शत्रुओं को क्षमा करने वाली और आनंद में मग्न रहने वाली देवी! हे तीनों लोकों का पालन करने वाली, भगवान शंकर को प्रसन्न करने वाली, पापों को दूर करने वाली और ध्वनि में आनंद लेने वाली देवी! हे राक्षसों के क्रोध को शांत करने वाली, अदिति के पुत्रों (देवताओं) के शत्रुओं को सुखाने वाली, बुरी बुद्धि का पोषण करने वाली और दोषों में आनंद लेने वाली देवी! हे महिषासुर का मर्दन करने वाली, सुंदर जटाजूट वाली और पर्वतराज हिमालय की पुत्री, तुम्हारी जय हो, जय हो!
यह श्लोक देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन करता है, जिसमें उन्हें देवताओं पर कृपा करने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली और तीनों लोकों का पालन करने वाली बताया गया है।
यह श्लोक देवी दुर्गा की स्तुति है, जिसमें उनके विभिन्न स्वरूपों और कार्यों का वर्णन किया गया है। उन्हें देवताओं पर कृपा बरसाने वाली, शत्रुओं का नाश करने वाली, तीनों लोकों का पालन करने वाली और पापों का नाश करने वाली बताया गया है। वे भगवान शिव को प्रिय हैं और उनकी ध्वनि में आनंद लेती हैं। वे राक्षसों के क्रोध को शांत करती हैं और बुरी बुद्धि का पोषण करने वालों का नाश करती हैं। अंत में, उन्हें महिषासुर का वध करने वाली और हिमालय की पुत्री के रूप में जय जयकार किया गया है।
This shloka symbolizes the power and motherhood of Goddess Durga. It tells us that Goddess Durga always protects her devotees and guides them on the right path.
Victory, victory to you, O daughter of the mountain, with beautiful tresses, slayer of Mahishasura! Showerer of boons on the Gods, destroyer of the wicked, forgiver of the evil-faced, delighting in joy, sustainer of the three worlds, pleasing to Shankara, remover of sins, delighting in sound, suppressor of the anger of the demons, destroyer of the sons of Diti, nurturer of evil thoughts, delighting in faults.
This shloka describes the greatness of Goddess Durga, portraying her as the one who bestows grace upon the gods, destroys enemies, and sustains the three worlds.
This shloka is a hymn to Goddess Durga, describing her various forms and deeds. She is described as the one who showers grace on the gods, destroys enemies, sustains the three worlds, and destroys sins. She is dear to Lord Shiva and enjoys sound. She appeases the anger of demons and destroys those who harbor evil thoughts. Finally, she is hailed as the slayer of Mahishasura and the daughter of the Himalayas.
Sentence - 1¶
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सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
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Meaning¶
हे देवताओं पर वर्षा करने वाली, दुस्साहसी शत्रुओं का नाश करने वाली, दुष्ट मुख वाले शत्रुओं को क्षमा करने वाली और आनंद में मग्न रहने वाली देवी!
O showerer of boons on the Gods, destroyer of the wicked, forgiver of the evil-faced, delighting in joy!
Meaning of Words¶
सुरवरवर्षिणि | suravaravarṣiṇi | ||
देवताओं पर वर्षा करने वाली | Showerer of boons on the Gods | ||
दुर्धरधर्षिणि | durdharadharṣiṇi | ||
दुस्साहसी शत्रुओं का नाश करने वाली | Destroyer of the wicked | ||
दुर्मुखमर्षिणि | durmukharṣiṇi | ||
दुष्ट मुख वाले शत्रुओं को क्षमा करने वाली | Forgiver of the evil-faced | ||
हर्षरते | harṣarate | ||
आनंद में मग्न रहने वाली | Delighting in joy |
Sentence - 2¶
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त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
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Meaning¶
हे तीनों लोकों का पालन करने वाली, भगवान शंकर को प्रसन्न करने वाली, पापों को दूर करने वाली और ध्वनि में आनंद लेने वाली देवी!
Sustainer of the three worlds, pleasing to Shankara, remover of sins, delighting in sound!
Meaning of Words¶
त्रिभुवनपोषिणि | tribhuvanapoṣiṇi | ||
तीनों लोकों का पालन करने वाली | Sustainer of the three worlds | ||
शङ्करतोषिणि | śaṅkaratoṣiṇi | ||
भगवान शंकर को प्रसन्न करने वाली | Pleasing to Shankara | ||
किल्बिषमोषिणि | kilbiṣamoṣiṇi | ||
पापों को दूर करने वाली | Remover of sins | ||
घोषरते | ghoṣarate | ||
ध्वनि में आनंद लेने वाली | Delighting in sound |
Sentence - 3¶
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दनुजनिरोषिणि दितिसुतशोषिणि दुर्मतिपोषिणि दोषरते
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Meaning¶
हे राक्षसों के क्रोध को शांत करने वाली, अदिति के पुत्रों (देवताओं) के शत्रुओं को सुखाने वाली, बुरी बुद्धि का पोषण करने वाली और दोषों में आनंद लेने वाली देवी!
Suppressor of the anger of the demons, destroyer of the sons of Diti, nurturer of evil thoughts, delighting in faults!
Meaning of Words¶
दनुजनिरोषिणि | danujaniroṣiṇi | ||
राक्षसों के क्रोध को शांत करने वाली | Suppressor of the anger of the demons | ||
दितिसुतशोषिणि | ditisutaśoṣiṇi | ||
अदिति के पुत्रों (देवताओं) के शत्रुओं को सुखाने वाली | Destroyer of the sons of Diti | ||
दुर्मतिपोषिणि | durmatipoṣiṇi | ||
बुरी बुद्धि का पोषण करने वाली | Nurturer of evil thoughts | ||
दोषरते | doṣarate | ||
दोषों में आनंद लेने वाली | Delighting in faults |
Sentence - 4¶
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जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते
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Meaning¶
हे महिषासुर का मर्दन करने वाली, सुंदर जटाजूट वाली और पर्वतराज हिमालय की पुत्री, तुम्हारी जय हो, जय हो!
Victory, victory to you, O slayer of Mahishasura, with beautiful tresses, daughter of the mountain!
Meaning of Words¶
जय जय | jaya jaya | ||
जय हो, जय हो | Victory, victory | ||
हे | he | हे | O (addressing). |
महिषासुरमर्दिनि | mahiṣāsuramardini | ||
महिषासुर का मर्दन करने वाली | Slayer of Mahishasura | ||
रम्यकपर्दिनि | ramyakpardini | ||
सुंदर जटाजूट वाली | With beautiful tresses | ||
शैलसुते | śailasute | ||
पर्वतराज हिमालय की पुत्री | Daughter of the mountain | ||