Arjuna’s Inner Struggle - 01 - 03¶
The Shloka¶
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पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
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Paśyaitāṁ Pāṇḍuputrāṇāmācārya mahatīṁ camūm ।
Vyūḍhāṁ Drupada-putreṇa tava śiṣyeṇa dhīmatā ॥
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Meaning / Summary¶
यह श्लोक दुर्योधन के मन की चिंता और ईर्ष्या को दर्शाता है। वह पांडवों की शक्ति को स्वीकार करता है और द्रोणाचार्य को अपनी निष्ठा और कर्तव्य याद दिलाने के लिए उनके पुराने शिष्य और शत्रु के पुत्र धृष्टद्युम्न का उल्लेख करता है। यह उस मनोदशा को स्थापित करता है जिसमें युद्ध का आरंभ होता है - आशंका, चुनौती और व्यक्तिगत प्रतिशोध का मिश्रण।
हे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए, जिसे आपके ही बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने व्यूह रचना करके सुव्यवस्थित किया है।
दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य को पांडवों की विशाल और सुव्यवस्थित सेना देखने के लिए कह रहा है, जो उनके ही बुद्धिमान शिष्य धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहित की गई है।
यह श्लोक महाभारत युद्ध के आरंभ में, धृतराष्ट्र के प्रश्न के उत्तर में संजय द्वारा सुनाए जा रहे विवरण का हिस्सा है। यहाँ कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में दुर्योधन अपने गुरु द्रोणाचार्य से कह रहा है, “हे आचार्य! आप पाण्डुपुत्रों (पांडवों) की इस विशाल और सुव्यवस्थित सेना को देखिए। इस सेना की व्यूह-रचना (सैन्य-विन्यास) आपके ही बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न ने की है। “ दुर्योधन इस बात पर विशेष जोर दे रहा है कि पांडवों की सेना का सेनापति और व्यूह-रचना करने वाला व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि द्रोणाचार्य का ही शिष्य है। यह कहकर दुर्योधन गुरु द्रोण को ताना मार रहा है और उन्हें उनकी पूर्व शत्रुता तथा कर्तव्य की याद दिला रहा है।
This verse reveals Duryodhana’s anxiety and envy regarding the Pandava army’s strength. By mentioning Dhrishtadyumna, Dronacharya’s former student and the son of his old foe, Duryodhana attempts to challenge Dronacharya’s loyalty and remind him of his duty. It sets the tone for the war’s commencement, reflecting a mixture of apprehension, challenge, and personal vendetta.
O preceptor! Behold this mighty army of the sons of Pandu, arrayed in a military formation by your intelligent disciple, the son of Drupada.
Duryodhana asks his guru Dronacharya to behold the vast and well-arranged army of the Pandavas, which has been strategically arrayed by his own intelligent disciple, Dhrishtadyumna.
This verse is spoken by Duryodhana to his preceptor Dronacharya on the battlefield of Kurukshetra, as narrated by Sanjaya to King Dhritarashtra. Duryodhana points out the formidable strength and meticulous arrangement of the Pandava army. He says, “O Acharya (teacher)! Just look at this vast and well-organized army belonging to the sons of Pandu (the Pandavas). It has been expertly arrayed in a strategic military formation by Drupada’s son, Dhrishtadyumna, who is ironically your own intelligent disciple.” Duryodhana’s statement is intended to instigate Dronacharya, reminding him that the very person leading and arranging the enemy’s forces is someone he himself trained, and also highlighting the long-standing animosity between Dronacharya and Drupada’s lineage.
Sentence - 1¶
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पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् ।
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Meaning¶
हे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए।
O preceptor! Behold this mighty army of the sons of Pandu.
Meaning of Words¶
पश्य | paśya | ||
देखो, निहारो | Behold, see | ||
एताम् | etām | ||
इसको, यह (स्त्रीलिंग) | This is the feminine singular accusative form of ‘etad’ (this), meaning ‘this’ or ‘this one’. Here, it refers to ‘chamūm’ (the army). | ||
पाण्डुपुत्राणाम् | Pāṇḍuputrāṇām | ||
पाण्डुपुत्रों की, पांडवों की | Of the sons of Pandu, of the Pandavas | ||
आचार्य | ācārya | ||
हे आचार्य, हे गुरु | O preceptor, O teacher | ||
महतीम् | mahatīm | ||
विशाल, बड़ी, महान | Mighty, vast, great | ||
चमूम् | camūm | ||
सेना को, फौज को | Army, host (accusative singular) |
Sentence - 2¶
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व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
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Meaning¶
जिसे द्रुपद के पुत्र और आपके बुद्धिमान शिष्य ने व्यूह रचना करके सुव्यवस्थित किया है।
Arrayed in a military formation by the intelligent son of Drupada, your own disciple.
Meaning of Words¶
व्यूढाम् | vyūḍhām | ||
व्यूह रचना की हुई, सुव्यवस्थित | Arrayed in a military formation, well-arranged | ||
द्रुपदपुत्रेण | Drupada-putreṇa | ||
‘द्रुपद’ पांचाल देश के राजा थे, और द्रोणाचार्य के बचपन के मित्र थे जो बाद में उनके शत्रु बन गए। द्रुपद ने द्रोणाचार्य से प्रतिशोध लेने के लिए एक यज्ञ किया था, जिससे धृष्टद्युम्न का जन्म हुआ, जो द्रोणाचार्य का वध करने के लिए पैदा हुआ था। ‘पुत्रेण’ का अर्थ है ‘पुत्र द्वारा’। इस प्रकार ‘द्रुपदपुत्रेण’ का अर्थ है ‘द्रुपद के पुत्र द्वारा’। यहाँ यह ‘धृष्टद्युम्न’ को संदर्भित करता है। | By the son of Drupada | ||
तव | tava | ||
तुम्हारे, आपका | Your, of you | ||
शिष्येण | śiṣyeṇa | ||
शिष्य द्वारा, विद्यार्थी द्वारा | By the disciple, by the student | ||
धीमता | dhīmatā | ||
बुद्धिमान द्वारा, समझदार द्वारा | By the intelligent, by the wise one |